हौज़ा समाचार एजेंसी के संवाददाता के अनुसार, मोहम्मद महदी शब ज़िन्दादार ने ईद-ए-सईद ग़दीर के अवसर पर क़ुम के हौज़ा इल्मिया के छात्रों के अमामा-पोशी समारोह में शहीद आयतुल्लाह सदूक़ी हौज़वी परिसर के मोअक़िब में आयोजित जनसभा में हुआ, कहा:
"मैं महान और अत्यंत महत्वपूर्ण ईद-ए-ग़दीर की शुभकामनाएँ हज़रत बक़ीयतुल्लाह अल-आज़म (अ), दुनिया भर के उनके अनुयायियों, सर्वोच्च नेतृत्व, मरजा-ए-तक़लीद, हौज़ा के विद्वानों तथा उन सभी लोगों को प्रस्तुत करता हूँ जो लगभग तीन महीनों से प्रतिदिन रात में अपने कर्तव्य के निर्वहन हेतु सड़कों पर उपस्थित रहते हैं।"
हौज़ा इल्मिया की सर्वोच्च परिषद के सचिव ने इमाम ख़ुमैनी (र) की पुण्यतिथि का ज़िक्र करते हुए कहा: "हज़रत इमाम ख़ुमैनी (र) की महानता और भव्यता का परिणाम यह हुआ कि सदियों से अइम्मा-ए-मासूमीन (अ) के चाहने वालों की जो आकांक्षा थी, वह पूरी हुई और प्रिय ईरान में इस्लामी शासन की स्थापना संभव हुई।"
उन्होने खुशी और ग़म एक साथ होने के संबंध मे कहा कि "शिया व्यवस्था की शुरुआत से ही खुशी और ग़म साथ-साथ चलते रहे हैं। आज हमारे दिल ईद-ए-ग़दीर जैसी महान और पवित्र ईद की वजह से प्रसन्न हैं, लेकिन साथ ही इमाम ख़ुमैनी (रह.) के विसाल और अपने नेताओं की शहादत के कारण दुःखी भी हैं।"
आयतुल्लाह शब ज़िन्दादार ने धार्मिक पोशाक के विशेष महत्व से संबंधित कुछ घटनाएँ सुनाते हुए नव-अमामा-पोश छात्रों से कहा: "जिन प्रिय छात्रों को आज रात इस पवित्र वेशभूषा को धारण करने का सौभाग्य मिला है, उन्हें यह जानना चाहिए कि इस पोशाक को पहनना, इंशाअल्लाह, अल्लाह की विशेष कृपाओं का प्रारंभ बनेगा।"

आयतुल्लाह शब ज़िन्दादार ने आगे कहा: "जो व्यक्ति इस पोशाक को धारण करता है, उस पर विशेष जिम्मेदारियाँ आ जाती हैं। यह अमामा हज़रत बक़ीयतुल्लाह अल-आज़म (अ) से संबंध का प्रतीक है। इसलिए उसका आचरण, गंभीरता और शालीनता ऐसी होनी चाहिए कि जो भी उसे देखे, उसे आध्यात्मिकता की याद आए।"
अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की: "अल्लाह शीघ्र ही मुसलमानों और शियो की चिंताओं को, चाहे वे इस देश में हों, लेबनान में हों या अन्य स्थानों पर, दूर कर दे।"

यह समारोह क़ुम हौज़ा इल्मिया के तहज़ीब विभाग के प्रयासों से आयोजित किया गया था। समारोह में अहमद बिन मूसा शाहचेराग़ के पवित्र हरम का परचम और वहाँ के ख़ादिमों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया तथा उपस्थित लोगों के दिलों को उनकी पवित्र बारगाह की ओर आकर्षित कर दिया।
वफ़ादार और क्रांतिकारी जनता, जो 95 रातों से प्रिय ईरान, इस्लामी क्रांति की रक्षा, मुस्लिम समुदाय के नेता के प्रति निष्ठा तथा शहीद इमाम के रक्त का प्रतिशोध लेने के संकल्प के साथ मैदान में उपस्थित रही है, इस अमामा-पोशी समारोह की गरिमा बढ़ाने वाली बनी।
उन्होंने इमाम ज़माना (अ) के सैनिकों के रूप में पहचाने जाने वाले इन नव-अमामा-पोश छात्रों तथा फ़िक़्ह और इस्लामी ज्ञान के मार्ग के साधकों को इस सफलता पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

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